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एमएसएमई के विषय में

अ.    एमएसएमई क्या है ?

आ.  उद्यमिता ज्ञापन

 

 

एमएसएमई क्या है ?

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम, 2006 के प्रावधान के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दो श्रेणी में दर्शाया गया हैः

 

 

अ.  उत्पादक उद्यम- वे उद्यम जो उद्योग (विकास व विनियमन) अधिनियम, 1951 के तहत किसी उत्पाद को तैयार या उत्पन्न करते हैं।  प्लान्ट व मशीनरी में निवेश के अनुसार उत्पादक उद्यम को वर्णित किया जा सकता है।

 

ब.  सेवा उद्यम- वे उद्यम जो सेवा प्रदान करते हैं या उपलब्ध कराते हैं और उन्हें उपकरणों में निवेश पर वर्णित किया जा सकता है।

 

दिनांक 29-09-2006 के नोटिफिकेशन एस ओ 1642(ई) के अनुसार उत्पादक/सेवा उद्यमों के लिए प्लान्ट व मशीनरी/यांत्रिक उपकरणों में निवेश की सीमा इसप्रकार हैः

 

उत्पादक क्षेत्र

उद्यम             प्लान्ट व मशीनरी में निवेश

सूक्ष्म उद्यम        पच्चीस लाख रूपए तक

लघु उद्यम          पच्चीस लाख रूपए से पाँच करोड़ रूपए तक

मध्यम उद्यम       पाँच करोड़ रूपए से दस करोड़ रूपए तक

 

सेवा क्षेत्र

उद्यम             उपकरणों में निवेश

सूक्ष्म उद्यम        दस लाख रूपए तक

लघु उद्यम          दस लाख रूपए से दो करोड़ रूपए तक

मध्यम उद्यम       दो करोड़ रूपए से पाँच करोड़ रूपए तक

 

 

उद्यमिता ज्ञापन

अन्य विषय, तत्संबंधी आनुसंगिकता सह उद्यमिता ज्ञापन भरने की पद्धति इसप्रकार हैः

(क)   इंटरनेट से उद्यमिता ज्ञापन का फार्म डाउनलोड किया जा सकता है, जिसका पता राज्य सरकार/यू टी के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से संबंधित निदेशालय से मिल सकता है।  या फिर जिला उद्योग केन्द्र से हार्ड कॉपी प्राप्त की जा सकती है। यह फार्म डीसी (एमएसएमई) वेबसाइट www.dcmsme.gov.in से भी डाउनलोड किया जा सकता है।

 

(ख)   कोई व्यक्ति जो अपनी क्षमता पर सूक्ष्म या लघु उद्यम स्थापित करना चाहता है, या अपनी क्षमता पर सेवा प्रदान करने या उपलब्ध करवाना चाहता है या उत्पाद तैयार करने या बनाने हेतु मध्यम उद्यम स्थापित करना चाहता है, वे सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यम में से जो भी हो, अपने क्षेत्र में जिला उद्योग केन्द्र में ज्ञापन जमा कर सकता है।

 

(ग)    जिला उद्योग केन्द्र ज्ञापन के उस फार्म के मिलते ही पाँच दिनों के अन्दर डाक द्वारा या यदि ज्ञापन व्यक्तिशः या ऑनलाइन में जमा किया गया हो तो उसी दिन, सारा कोड भरकर ई एम संख्या, जारी करने की तिथि और यूनिट का श्रेणी उल्लेख करते हुए एक पावती पत्र प्रदान करेंगे।

 

(घ)    पावती पत्र जारी करने से पहले जिला उद्योग केन्द्र यह देख लें कि फार्म पूर्ण रूप से भरा है, विशेषकर उस फार्म में हस्ताक्षर हों और उसमें वचन दिया गया हो, जो उद्यमिता ज्ञापन का एक अंश है।

 

(ड.)   जिला उद्योग केन्द्र सेवा प्रदाता या सेवा उपलब्ध करवाने वाले सूक्ष्म व लघु उद्यम और मध्यम उद्यमिओं द्वारा जमा किए गए सारे उद्यमिता ज्ञापन की रिकार्ड का रखरखाव करेंगे।  जिला उद्योग केन्द्र उस राज्य/अधिकार क्षेत्र में स्थित एमएसएमई-विकास संस्थान में आवंटित ई एम संख्या सह उद्यमिता ज्ञापन की एक प्रति भेजेंगे।

 

(च)   जिला उद्योग केन्द्र उत्पादक/उत्पाद तैयार करनेवाले मध्यम उद्यमिओं द्वारा जमा किए गए सारे उद्यमिता ज्ञापन की रिकार्ड का रखरखाव करेंगे और आवंटित ई एम संख्या सह उद्यमिता ज्ञापन की एक एक प्रति उस राज्य/अधिकार क्षेत्र में स्थित एमएसएमई-विकास संस्थान में और विकास आयुक्त (एमएसएमई) के कार्यालय में संयुक्त विकास आयुक्त (एमएसएमई नीति) के पास भेजेंगे।

 

(छ)   ज्ञापन का फार्म दो भागों में बंटा है।  कोई भी व्यक्ति, जो सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यमी के रूप में सेवा प्रदान या सेवा उपलब्ध करवाना चाहते हों या वे जो मध्यम उद्यमी के रूप में उत्पादक/उत्पाद तैयार करना चाहते हों वे जिला उद्योग केन्द्र में उद्यमिता ज्ञापन की भाग-। भरेंगे।

 

(ज)   जब उद्यमी उत्पादन शुरू कर दें या सेवा प्रदान या सेवा उपलब्ध करवाने लगे तो वे जिला उद्योग केन्द्र में उद्यमिता ज्ञापन की भाग-।। भरेंगे।

 

(झ)   यदि उद्यमिता ज्ञापन की भाग-। भरने के दो साल के अन्दर भाग-।। नहीं भरा जाता है तो ज्ञापन की भाग-। वैध नहीं होगा।

 

(ञ)   उद्यमिता ज्ञापन जमा कर चुके उद्यमी यदि प्लांट व मशीनरी या उपकरण में निवेश में बदलाव करते हैं तो लिखित में बदलाव किए गए निवेश की जानकारी जिला उद्योग केन्द्र को एक महीने के अन्दर देना होगा।

 

(ट)    उद्यमिता ज्ञापन जमा कर चुके उद्यमी यदि उत्पाद एवं सेवा में बदलाव करते हैं या उत्पाद या सेवाक्षेत्र को बढ़ाते हैं तो लिखित में उसकी जानकारी जिला उद्योग केन्द्र को एक महीने के अन्दर देना होगा।

 

(ठ)    जिला उद्योग केन्द्र लिखित में रिकार्ड रखने के साथ साथ कंप्युटर में भी सारा रिकार्ड रखेंगे।

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